वैधानिक बोनस के भुगतान के बारे में सब कुछ

भारत में प्रारंभिक यूरोपीय कंपनियां अपने कर्मचारियों को दिवाली जैसी त्योहारों पर ‘बख्शीश’ या उपहार दिया करती थी, शायद इसलिए क्योंकि वे अपने हो रहे मुनाफ़े से काफ़ी खुश थे। नियोक्ता अपने कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए बोनस देते हैं।

नियोक्ताओं द्वारा वितरित इस अधिशेष पर कर्मचारियों का कानूनी अधिकार होता है। नियोक्ताओं को इस अधिशेष को श्रमिकों के बीच उनके वेतन के आधार पर वितरित करना चाहिए और इस व्यय को महंगाई भत्ते या किसी अन्य भत्ते में नहीं जोड़ना चाहिए। बोनस कर्मचारियों को उनकी सर्वोत्तम क्षमता से काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है। 1965 के बोनस भुगतान अधिनियम के अन्तर्गत एक वैधानिक बोनस स्थापित होता है। प्रोत्साहन बोनस के विपरीत, वैधानिक बोनस अनिवार्य है। अधिनियम में यह साफ़ किया गया है कि वैधानिक बोनस, बोनस भुगतान अधिनियम के तहत, कर्मचारी का अधिकार है और यह कोई विकल्प नहीं है।

विषयसूची

वैधानिक बोनस क्या है?

‘बोनस’ शब्द की उचित परिभाषा नहीं देता। वैधानिक बोनस नियमित भुगतान के अलावा प्राप्त होने वाला एक मौद्रिक प्रोत्साहन होता है।1965 के बोनस भुगतान अधिनियम के तहत, नियोक्ताओं द्वारा अपने कर्मचारियों को वैधानिक बोनस वितरित करना अनिवार्य है।

बोनस एक अतिरिक्त धनराशि है जो किसी कर्मचारी को उसके क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन के लिए उपहार या पुरस्कार के रूप में उसको दी जाती है। कंपनी द्वारा कंपनी की कमाई को उसके कर्मचारियों के बीच वितरित करना, बोनस भुगतान का प्राथमिक उद्देश्य होता है। वैधानिक बोनस किसी संगठन के लाभ का एक हिस्सा है, जो उसके कर्मचारियों की कोशिशों का प्रत्यक्ष परिणाम होता है।

बोनस भुगतान अधिनियम, 1965

बोनस भुगतान अधिनियम कर्मचारियों के लाभ के लिए बनाया गया एक कल्याणकारी कानून है। इस अधिनियम के अनुसार, कर्मचारियों को अपने नियोक्ता के मुनाफे को साझा करने का क़ानूनी हक़ प्राप्त है।

अधिनियम के अनुसार, हर वो कर्मचारी जो 10,000 रुपये से अधिक वेतन या मजदूरी प्रतिमाह प्राप्त करता है, इस बोनस भुगतान का पात्र है।

किसी कर्मचारी को प्रोत्साहित करने के लिए नियमित वेतन के अतिरिक्त किया गया भुगतान बोनस कहलाता है। 1965 के बोनस भुगतान अधिनियम के तहत, व्यवसायों को अपने कर्मचारियों को व्यवसाय की कामयाबी के आधार पर एक राशि प्रदान करने की आवश्यकता होती थी। इस अधिनियम के तहत, कर्मचारियों को अपने कम्पनी की आमदनी में हिस्सा प्राप्त करने की अनुमति मिलती है।

अधिनियम के अंतर्गत आने वाले संस्थान

  • भारत में हर स्थापित हर संस्थान
  • पिछले वर्ष के दौरान 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाला प्रत्येक संस्थान (एक बार जब अधिनियम किसी संस्थान पर लागू हो जाता है, तो भले ही कर्मचारियों की संख्या 20 से कम हो जाए, तब भी प्रशासनिक रूप से यह अधिनियम उस पर चलता रहता है)
  • भारत भर में अलग-अलग विभागों/परियोजनाओं/शाखाओं से मिलकर सेवाएँ प्रदान करने वाले संस्थान 
  • अगर शाखाओं/विभागों/परियोजनाओं के लिए अलग से बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाता तैयार और बनाए रखा जाता है, तो वे बोनस की गणना के लिए अलग-अलग संस्थानों के रूप में कार्य करेंगे।

वैधानिक बोनस का प्रतिशत क्या है?

  • प्रत्येक कम्पनी को योग्य कर्मचारियों को लेखांकन वर्ष के लिए उनके वेतन का 8.33% बोनस प्रदान करना होगा।
  • प्रत्येक कम्पनी को योग्य कर्मचारियों को लेखांकन वर्ष के लिए उनके वेतन का अधिकतम 20% बोनस प्रदान करना होगा।
  • नियोक्ता कर्मचारियों को वार्षिक का 8.33% से 20% का भुगतान कर सकते हैं ।

वैधानिक बोनस के लिए कौन पात्र है?

  • एक 21,000 प्रति माह रुपये से अधिक वेतन या मजदूरी पर नियुक्त कर्मचारी।
  • किसी कर्मचारी की कमाई कम से कम 7000 प्रति माह या ऐसी नौकरी के लिए सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन है, तो कर्मचारी बोनस के लिए पात्र है (चाहे सरकार ने न्यूनतम वेतन निर्धारित किया हो या नहीं)।
  • प्रत्येक कर्मचारी को एक बोनस का हक़ है जिसने वित्तीय वर्ष के दौरान कम से कम तीस कामकाजी दिन काम किया हो।
  • एक प्रायोगिक कर्मचारी भी बोनस के लिए पात्र है।
  • अंशकालिक आधार पर काम करने वाले सफाई कर्मचारी भी बोनस के लिए पात्र हैं (लेकिन एक ठेकेदार की भूमिका में नहीं)।
  • संगठन से इस्तीफा देने वाले कर्मचारी भी बोनस के पात्र हैं।

वैधानिक बोनस के लिए कौन पात्र कर्मचारी नहीं हैं?

निम्नलिखित समूह वैधानिक बोनस के लिए योग्य नहीं हैं:

  • आम या जीवन बीमा कंपनियों के कर्मचारी, व्यापारी जहाज, शिपिंग, डॉक कर्मचारी, केंद्रिय और राज्य सरकार कर्मचारी, शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, वाणिज्य मंडलों, भारतीय रेड क्रॉस और आरबीआई के कर्मचारी।
  • तीस दिन से कम समय के लिए काम करने वाले कर्मचारी।
  • ठेकेदारों के माध्यम से भर्ती किए गए कर्मचारी।
  • संस्थान परिसर में दंगाई या हिंसक व्यवहार के लिए जिन कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया हो।

कर्मचारियों और नियोक्ताओं के अधिकार

कर्मचारियों का अधिकार

  • कर्मचारियों को बोनस की रक़म अदा ना होने पर, दावा अधिनियम के तहत देय भुगतान की तारीख से एक वर्ष के बाद, बकाया किसी भी अवैतनिक बोनस के लिए सरकार से शिकायत करने का पूरा अधिकार होता है।
  • श्रम न्यायालयों और न्यायाधिकरणों को किसी भी मुद्दे पर सुनवाई करने की शक्ति होती है। हालाँकि, जिन कर्मचारियों को बोनस नहीं मिलता है, वे अपने मामले इन अदालतों या न्यायाधिकरणों में नहीं ले जा सकते हैं।
  • प्रत्येक कर्मचारी को कम्पनी की पेशकशों के बारे में जानकारी मांगने का कानूनी अधिकार है ताकि वे यह जाँच सकें कि उन्हें उचित वेतन मिलता है या नहीं।

नियोक्ता का अधिकार

  • श्रम न्यायालयों और न्यायाधिकरणों के पास इस अधिनियम के किसी भी धारा की व्याख्या के दावे पर अधिकार क्षेत्र होता है।
  • दुर्व्यवहार के लिए कटौती योग्य बोनस या पहले से भुगतान किए गए त्योहार बोनस को परिस्थितियों के आधार पर, सुचित करके, कर्मचारी के वेतन से उचित रूप से काटा जा सकता है।
  • दुराचार, अपमानजनक व्यवहार या व्यवसाय की भूमि को ब्लॉक करने के लिए निकाले गए कर्मचारी, किसी भी बोनस राशि को रोक सकते हैं।

वैधानिक बोनस भुगतान प्राप्त करने की समय सीमा

अधिनियम के अनुसार, नियोक्ताओं को लेखा वर्ष के समापन के 8 महीने के भीतर ही कर्मचारियों को बोनस वितरित करना चाहिए।

हालांकि, औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत मतभिन्न की स्थिति में(जब समझौता प्रभावी होता है), बोनस के प्रभावी होने पर, एक महीने के भीतर ही वितरित किया जाना चाहिये।

वैधानिक बोनस पुनर्भुगतान

  • यदि किसी कर्मचारी को बोनस बकाया है, तो वह या उसके द्वारा अधिकृत कोई व्यक्ति पैसे वापस पाने के लिए अधिकारियों के पास आवेदन कर सकता है।
  • आगर सरकार को लगता है कि कोई कर्मचारी बोनस का हकदार है, तो वह कलेक्टर को एक प्रमाण पत्र जारी करती है, जो पैसे निकालता है।
  • कर्मचारी को पैसे देय होने के एक वर्ष के भीतर ही आवेदन करना होता है। अगर आवेदक उचित कारण प्रमाणित कर सकता है तो देर से आवेदन करने पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

नव स्थापित संगठन से संबंधित प्रावधान

जो हाल ही में स्थापित कंपनियां होती हैं,तो कर्मचारियों को निम्नलिखित वैधानिक बोनस का हक़ होता है:

  • पहले पांच वर्षों में कर्मचारियों को बोनस तभी दिया जाता है जब कंपनी मुनाफे में हो।
  • कर्मचारियों को छठे वर्ष में आवंटनीय अधिशेष से लाभ होता है, जो पांचवें या छठे वर्ष के बोनस को प्रभावित कर सकता है।
  • सातवें वर्ष में, कंपनी को आवंटनिय अधिशेष से बोनस वितरित करना होता है और पांचवें, छठे और सातवें वर्ष के बोनस को सेट करना होता है।

वैधानिक बोनस की गणना कैसे की जाती है?

  • अगर मूल वेतन+महंगाई भत्ता 21,000 रुपये से कम है तो बोनस दिया जाता है।
  • अगर मूल वेतन+महंगाई भत्ता 21,000 रुपये से अधिक है तो बोनस नहीं दिया जाता है।

निष्कर्ष

कंपनी द्वारा उत्पन्न लाभ से आने वाले धन को साझा करने से कम वेतन वाले कर्मचारियों को लाभ हो सकता है और उन्हें अपने वर्तमान वेतन और मिलने वाले आवश्यक धन के बीच अंतर को कम करने में मदद मिल सकती है।

संविधान का अनुच्छेद 43 सभी औद्योगिक और कृषि कर्मचारियों के जीवन मानकों में सुधारनें का उद्देश्य रखता है। उन कर्मचारियों के जीवन मानकों में सुधार करना जिनके प्रयासों ने उनके संगठन की लाभप्रदता में योगदान दिया है, काफ़ी प्रसंशनीय है।

1965 का बोनस भुगतान अधिनियम व्यवसायों द्वारा अपने कर्मचारियों को बोनस देने की इस प्रथा को क़ानूनी बनाने का प्रयास करता है। वैधानिक बोनस की गणना इस तकनीक का उपयोग करके निष्पक्ष रूप से की जा सकती है, जिसमें कमाई और उत्पादकता पर विचार किया जाता है। यह दृष्टिकोण कर्मचारियों को उनके नियमित वेतन या न्यूनतम वेतन के अलावा अतिरिक्त पैसा कमाने की अनुमति भी देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बोनस और अनुग्रह राशि के बीच क्या अंतर है?

बोनस एक व्यक्ति की आय और अन्य लाभों के ऊपर किया गया एक अतिरिक्त भुगतान होती है जो आम तौर पर उनके उत्पादकता या प्रदर्शन के स्तर से संबंधित होता है।

नियोक्ता द्वारा अस्तित्व की एक निश्चित अवधि, महत्वपूर्ण निर्यात आदेश के सफल समापन, या किसी और घटना के बाद अनुग्रह भुगतान किया जा सकता है जो एक महत्वपूर्ण मिल पड़ाव है।

क्या कोई प्रतिष्ठान कुछ वर्षों के बाद बोनस बंद कर सकता है?

नहीं, जब कर्मचारी पात्र हो जाते हैं तो बोनस देना अनिवार्य हो जाता है।

बोनस में क्या जाता है?

वेतन और मजदूरी में केवल मूल वेतन और बोनस भुगतान के लिए विवेकाधीन भत्ता ही शामिल किया जाता है।

क्या संविदा कर्मचारी बोनस प्राप्त करने के पात्र हैं?

नहीं, नियोक्ता के पास अपने अधीन स्वतंत्र ठेकेदारों को बोनस देने का अधिकार नहीं है।

बोनस के लिए कौन पात्र है?

हर कर्मचारी अपने नियोक्ता द्वारा एक लेखा वर्ष में भुगतान किए गए बोनस के लिए पात्र है।